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पीआर सेक्टर में मिलेगा क्षेत्रीय भाषाओं को बल, बढ़ेगा हिंदी का महत्व

Punjab Tribune Bureau | September 04, 2018 04:21 PM
इन्दौर:  यदि आप अपनी बातों से किसी को प्रभावित करने का हुनर रखते है तो आपकी यह कला आपको पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में सफल करियर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि समय के साथ पब्लिक रिलेशन सेक्टर में भी बड़े बदलाव देखने को मिले है। यहां बेहतर कम्युनिकेशन के अलावा अन्य कई स्किल्स की डिमांड भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में जो लोग इस क्षेत्र से जुड़कर अपने सुनहरे भविष्य की कल्पना कर रहे है, उन्हें समय के साथ खुद में कई बड़े बदलाव लाने की दरकार भी है। 
 
पिछले कुछ सालों में पीआर फम्र्स ने डिजिटल, सोशल मीडिया या कंटेंट आधारित कैंपेन की तरफ रुख करना शुरू कर दिया है, जिस वहज से इस फील्ड में ट्रेडिशनल मीडिया की जगह वर्चुअल मीडिया अधिक हावी हो गया है। लिहाजा मौजूदा समय में पीआर प्रोफेशनल्स के सामने खुद को परंपरागत मीडिया (अखबार व न्यूज़ चैनेल्स) के साथ-साथ न्यू मीडिया से भी अपडेट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि कुछ पीआर प्रोफेशनल्स ऐसे भी है जो इन चुनौतिओं को पब्लिक रिलेशन सेक्टर के भविष्य के लिए अच्छा मानते है और ढेरों रोजगार पैदा होने की उम्मीद रखते है।
 
मुंबई स्थित पब्लिक रिलेशन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी पीआर 24x7 के डायरेक्टर अतुल मलिकराम बताते है कि, एक पीआर पर्सन प्रेस विज्ञप्ति बनाने से लेकर अपने क्लाइंट्स से बात करना, क्लाइंट्स के लिए कैंपेन चलाना या दूसरे माध्यमों से उनकी छवि को जनता में सुधारना और किसी व्यक्ति, संगठन, सरकार या कंपनी के सकारात्मक संदेश जनता के बीच प्रस्तुत करने का काम करता है। इसके लिए जरूरी है कि पीआर प्रोफेशनल अच्छी राइटिंग और बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स रखने के साथ-साथ न्यू मीडिया की जानकारी भी रखता हो। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में लगातार बढ़ रहे मोबाइल और इंटरनेट के इस्तेमाल ने इमेज मेकिंग के काम को पहले की तुलना में थोड़ा आसान बना दिया है।  
 
अतुल मलिकराम के मुताबिक, मौजूदा समय रियल टाइम पीआर का है। अब खबरें तुरंत पैदा होती है और उनका मोल भी जल्द ही ख़त्म हो जाता है। ऐसे में पीआर पर्सन्स को रियल टाइम मीडिया के लिए काम करना आना चाहिए। इंडस्ट्री में ऐसे प्रोफेशनल्स की डिमांड काफी तेजी से बढ़ रही है जो रियल टाइम कवरेज दिला सकें। 
 
पीआर इंडस्ट्री में करीब 19 सालों का अनुभव रखने वाले अतुल मलिकराम इस फील्ड में न्यू मीडिया के रोल पर प्रकाश डालते हुए कहते है कि, भविष्य में पीआर इंडस्ट्री के भीतर भाषा को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जहां एक तरफ भारत में छटपटाती क्षेत्रीय भाषाओं में पीआर को बल मिलेगा वहीँ हिंदी भाषा का महत्व भी कई गुना बढ़ जाएगा। मलिकराम के मुताबिक, एक आंकड़े के अनुसार अगले 50 सालों में भारत से 400 क्षेत्रीय भाषाएं लुप्त हो सकती है। जिन्हें न्यू मीडिया के साथ जोड़कर, उनके अस्तित्व को बचाया जा सकता है। वहीँ देश की लगभग 54 प्रतिशत आबादी हिंदी भाषा का प्रयोग करती है और बेहतर जन संचार के लिए जरूरी है कि लोगों से उन्ही की भाषा में जुड़ा जाए। पीआर कंपनियां विभिन्न भाषाओं के कंटेंट पर काम करने के साथ ही उन्हें तेजी से प्रसारित करने के भी नए तरीके अपना रही है। इसके फलस्वरूप क्षेत्रीय भाषाओं और हिंदी को मुख्य धारा में लाना आसान हो जाएगा। इससे भाषा पर मजबूत पकड़ रखने वालों के लिए भी नए मौके बनेंगे। इसके अलावा वीडियो कंटेंट की ताकत भी समय के साथ बढ़ने वाली है। हम वीडियो, इमेज या स्लाइड शो के जरिए क्लाइंट तक अपनी बात प्रभावशाली तरीके से समझा पाते है।  
 
मलिकराम के अनुसार, एक पीआर प्रोफेशनल के लिए डिग्री के अलावा कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया एक्सपर्ट, कंटेंट राइटिंग और इवेंट मैनेजमेंट की संतुलित जानकारी भी होना जरूरी है। वहीं भारत में अब माइक्रो एडवरटाइजिंग में भी हाथ आजमाया जा रहा है। इसके जरिए किसी छोटी सी जगह पर होने वाले छोटे से आयोजन में भी अपनी बात इस प्रकार पहुंचाई जाती है जिससे वह उस आयोजन का हिस्सा लगे न कि प्रचार-प्रसार लगे। इन प्रोडक्ट्स या सर्विस को लोग हाथों हाथ अपनाते है।
 
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