संपादकीय

संवाद के पुल बनाने निकली हैं महिलाएं...

Punjab Tribune Bureau | October 27, 2018 12:17 PM
Punjab Tribune Bureau

संवाद यात्रा@गाँधी150

बोझ नहीं होती हैं बेटियां  –

 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150 वें जयंती वर्ष में देश के 8 राज्यों की 17 महिलाएं संवाद यात्रा पर निकली हैं। 21 अक्टूबर को गुजरात के साबरमती आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा 31 अक्टूबर को कश्मीर के जम्मू और 1 नवंबर को श्री नगर पहुंचकर संपन्न होगी। महिला पुरुष संबंधों में बढ़ रहे तनाव , महिला हिंसा और गैर बराबरी को ख़त्म करने के लिए आपसी संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह यात्रा निकाली गई है। यात्रा का एक उद्देश्य गाँधी विचार के अनुसार समाज में प्रेम, विश्वास व महिला पुरुष समानता के लिए वातावरण तैयार करना है। इस यात्रा का संयोजन गाँधी150 की राष्ट्रीय संयोजन समिति गाँधी शांति प्रतिष्ठान दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। यात्रा में गाँधी विचार से जुडी महिलाएं एवं राष्ट्रीय युवा संगठन के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह यात्रा अब तक 12 पड़ाव पार कर लगभग 25000 छात्र छात्राओं , नागरिकों के बीच संवाद स्थापित कर चुकी है। 

संवाद यात्रा की संयोजिका प्रेरणा देसाई कहती हैं कि हम लगातार ऐसा महसूस कर रहे हैं कि देश में आपसी संवाद टूटता जा रहा है। हम सभी ने राजनितिक दल , धर्म , जाति आदि सभी मुद्दों पर अपनी जिद पकड़ ली है इस कारण समाज में आपसी बिखराव बढ़ रहा है। यही स्थिति स्त्री पुरुष के आपसी संबंधों में भी बन गई है। हम देख रहे हैं कि समाज की बुनियाद स्त्री पुरुष के बीच के सम्बन्ध टूटने की घटनाएँ,आरोप प्रत्यारोप बढ़ रहे हैं। इसलिए इस बिखराव को रोकने के लिए समाज को संवेदन शील होकर आगे आना होगा।
यात्रा में सहभागी मप्र की कलावती सिंह , ओरिसा की मिन्ती और महाराष्ट्र की श्रृद्धा अपने अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं से अपील करते हैं कि बेटियों को सामाजिक आर्थिक बोझ मानना बंद कीजिये ! जो बोझ है वह आपको ख़ुशी कैसे दे सकती है और खुद भी कैसे खुश रह सकती है ? वे कहती हैं कि हम बेटियां भी मुकम्मल इन्सान हैं। बेटियां बोझ नहीं हैं। बनारस की जाग्रति के अनुसार वंश मात्र लड़कों से न तो बनता है न चलता है , इसके लिए लड़का - लड़की दोनों की जरूरत होती है। इसलिए लड़का लड़की में भेदभाव ख़त्म करने के लिए सभी को आगे आना होगा। यह संवाद यात्रा इसी दिशा में संवाद के पुल बनाने की कोशिश है।

लड़का - लड़की एक दूसरे के पूरक हैं –

गाँधी शांति प्रतिष्ठान दिल्ली से जुडी रूपल अजबे के अनुसार लड़का – लड़की एक दुसरे के पूरक हैं। वे एक दुसरे का जीवन समृद्ध बनाते हैं। इसलिए सभी को यह शर्त माननी चाहिए कि कोई लड़का – लड़की एक दुसरे का इस्तेमाल न करें ,एक दुसरे से बेईमानी न करें और हमेशा एक दुसरे का सम्मान करें। हैदराबाद की पत्रकार सरस्वती एवं गुड्डी छात्र छात्राओं के बीच सवाल खड़ा करती हैं कि लडकियाँ भी इन्सान हैं , यह बात समाज को और लड़कों को स्वीकार करना होगा। बदलते समय के साथ लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ी हैं इसलिये लड़कियों को लेकर समाज को अपनी सोच बदलनी होगी। सोच बदलेगी तो समस्या का समाधान भी निकलेगा। लोगों के बीच अपनी मधुर आवाज में मुंबई की प्योली,बनारस की जागृति और उत्तराखंड की यशोदा क्रांति गीत गाते हुए एकता समानता के भाव जगा रही हैं और यह समझाने की कोशिश कर रही कि आपसी टकराव से समस्या का हल नहीं होगा उसके लिए एक दुसरे को जानना समझना और मिल बैठकर समस्या का समाधान खोजना होगा। महिलाओं की इस संवाद यात्रा में उप्र की कहकशा,पुतुल ,ओरिसा से अनुपमा , भवानी , अपराजिता ,मप्र से शबनम ,दिल्ली से राखी और मधु, गुजरात से रिंकल और मानसी अपनी भागीदारी कर रही हैं तो राजीव , रणजीत और डा. विश्वजीत तैयारी टोली के हिस्से हैं। 

यहाँ से होकर गुजर रही संवाद यात्रा –

21 अक्टूबर को अहमदाबाद साबरमती आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा हरियाणा के सोनीपत पानीपत होते हुए , 26 को करनाल पंजाब के अम्बाला शहर , 27 को जालंधर एवं रापुर गाँव , 28 को गुरुदास पुर , 29 को पठानकोट एवं कश्मीर के जम्मू , 30 को उधमपुर होते हुए 31 अक्टूबर एवं 1 नवम्बर को श्री नगर में स्कूल, कोलेज एवं विभिन्न नागरिक समूहों के साथ संवाद स्थापित करेगी। गाँधी जी के 150 वें जन्म वर्ष में जारी यह महिला संवाद यात्रा विशेष रूप से उन क्षेत्रों से होकर गुजर रही हैं जहाँ लड़कियों-महिलाओं के साथ हिंसा, बाल विवाह, खरीद फरोख्त, पर्दाप्रथा और भेदभाव की घटनाएँ आयेदिन सामने आती रहती हैं।

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