Punjab

राहुल गांधी ने नवांशहर से चुराया जोशी का सुपर आइडिया

Rajinsh Sareen | March 28, 2019 12:01 PM

नवांशहर: जो बात अबकी लोकसभा चुनावी दौड़ में राहुल गांधी ने रोजगार अधिकार को लेकर कही है  उससे कहीं बेहतर इस विषय पर 2017  में पंजाब विधान सभा इलेक्शन के दौरान रहे विधायक उम्मीदवार अश्विनी जोशी ने विस्तार से लोगों के सामने रखी थी।  2017 में अश्विनी जोशी ने कहा था कि अगर देश को खुशहाल बनाना है और बेरोजगारी खत्म करनी है तो रोजगार अधिकार कानून लागू करवाना आवश्यक है।

उनका मानना है कि जब तक रोजगार अधिकार कानून नहीं बनता कोई भी सरकार बेरोजगारी खत्म नहीं कर पाएगी। क्योंकि जब तक रोजगार का अधिकार कानून नहीं बनाया जाता किसी भी पार्टी की सरकार  जिम्मेदारी नहीं निभाएगी कि वह सब को रोजगार प्रदान कराए। जोशी का मानना है कि जब  रोजगार अधिकार कानून बनेगा तब सरकार की जिम्मेवारी बन जाएगी के सभी को रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसा होने पर अपने आप ही घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और देश का हर खाली हाथ एक उत्पादक फैक्ट्री का रूप ले लेगा। उन्होंने कहा मेरे पास उसका संपूर्ण प्रोजेक्ट है लेकिन कोई भी सरकार कोई भी पार्टी बेरोजगारी खत्म करने के लिए चिंतित नहीं है।

उन्होंने बताया कि वोट मांगने के लिए बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और निभाए नहीं जाते। इसलिए लोग सतर्क रहें कि जो राजनीतिक पार्टी फ्री की चीजें देने का वादा करती है वह देश की प्रगति के लिए गंभीर नहीं है। बस बेरोजगारी खत्म करने की बजाय लोगों को भिखारी बनाना बना कर रखना चाहती है। ऐसी सोच के नेता कदापि देश के हित में नहीं है। देश को और देश के लोगों को अगर अमीर और खुशहाल बनाना है तो रोजगार के अवसर पैदा करके देने होंगे। हर गांव में हर घर में  उत्पादक मशीनें लगानी होंगी। उन्होंने कहा कि हमें चाइना का मॉडल अपनाने की जरूरत है । उनका पूछना है कि जरा बताएं जुराब,  कंघी , लिपस्टिक, चश्मा,  पेन,  बनाने वाली मशीनों को कितनी जगह चाहिए। जो किसी घर के किसी कमरे में रख कर उत्पादन शुरू कर उस घर को अमीर किया जा सकता है। ऐसी हजारों चीजें हैं जो हम चाइना से लेना बंद कर के अपने लोगों के घरों में बनवाना शुरू करें। 2017 में उन्होंने कहा था कि इलेक्शन मेरे लिए इलेक्शन नहीं बल्कि रोजगार अधिकार कानून की लड़ाई की शुरुआत है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका रोजगार अधिकार कानून का मुद्दा उन्होंने लोगों में ला दिया है और यह मुद्दा कभी मरेगा नहीं और वह तब तक इस मुद्दे के लिए लड़ते रहेंगे जब तक देश के नौजवान के लिए रोजगार अधिकार कानून देश में स्थापित नहीं होता।

 जोशी ने एक बहुत ही सरल और समझने वाली उदाहरण पेश की है। वे बताते हैं की एक बड़ी फैक्ट्री जिसमें रोजाना 100000 जुराब बनती है और ₹5 प्रती जुराब मुनाफे से उस फैक्ट्री का मालिक अकेला ही पांच लाख रोजाना कमा लेता है। उनका कहना है की अगर 200 जुराब प्रतिदिन बनाने वाली मशीन किसी बेरोजगार के घर में लगा दी जाए तो वह ₹ 1000 प्रतिदिन मुनाफा कमा सकता है। इस तरह 100000 जुराब बनाने वाली फैक्ट्री की बजाय किसी 2 गांव के 500 घरों में रोजाना हजार रुपये यानी तीस हजार प्रति महीना मुनाफे का प्रबंध हो जाएगा। उनका कहना है कि 130 करोड़ आबादी के भारत में लगभग 560 करोड  जुराब प्रति वर्ष बिकती हैं।  उन्होंने लिपस्टिक चश्मा पेन बटन चड्डी बनियान आदि की छोटी-छोटी उदाहरण देकर बताया कि अगर राजनीतिक पार्टियां और नेता देश और लोगों के प्रति ईमानदार होते तो इस सोच से एक नई क्रांति ला सकते थे।

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